Breaking News : लैंड फॉर जॉब केस में लालू परिवार पर आरोप तय
नई दिल्ली : लैंड फॉर जॉब घोटाला मामले में राष्ट्रीय जनता दल (राजद) प्रमुख और पूर्व केंद्रीय रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव के परिवार को बड़ा झटका लगा है। अदालत ने इस मामले में लालू यादव समेत उनके पूरे परिवार पर आरोप तय कर दिए हैं। कोर्ट के इस फैसले के बाद अब इस बहुचर्चित भ्रष्टाचार मामले में मुकदमे की औपचारिक सुनवाई का रास्ता साफ हो गया है।
अदालत ने जिन लोगों पर आरोप तय किए हैं , उनमें लालू प्रसाद यादव के अलावा उनकी पत्नी और पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी , बेटियां मीसा भारती और हेमा यादव , तथा बेटे तेज प्रताप यादव और बिहार के उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव शामिल हैं। कोर्ट के इस आदेश के साथ ही लालू परिवार के सभी प्रमुख सदस्यों को ट्रायल का सामना करना होगा।
हालांकि , इस मामले में कोर्ट ने एक अहम राहत भी दी है। लैंड फॉर जॉब घोटाले से जुड़े कुल 98 आरोपियों में से 52 लोगों को अदालत ने आरोपमुक्त कर दिया है। शेष 46 आरोपियों , जिनमें लालू परिवार के सदस्य भी शामिल हैं , के खिलाफ आरोप तय किए गए हैं। इससे यह साफ हो गया है कि अब मामला निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुका है।
गौरतलब है कि लैंड फॉर जॉब घोटाला 2004 से 2009 के बीच का बताया जाता है , जब लालू प्रसाद यादव केंद्र सरकार में रेल मंत्री थे। जांच एजेंसियों के अनुसार , इस दौरान रेलवे में ‘ ग्रुप-डी ’ पदों पर नियुक्तियों के बदले उम्मीदवारों से या उनके परिजनों से जमीनें ली गईं। आरोप है कि ये जमीनें लालू यादव और उनके परिवार के सदस्यों के नाम पर या उनसे जुड़ी कंपनियों के नाम पर रियायती दरों पर खरीदी गईं या उपहार के रूप में ली गईं।
जांच के दौरान केंद्रीय एजेंसियों ने दावा किया कि रेलवे में नियुक्ति पाने वाले कई उम्मीदवारों ने नौकरी के बदले अपनी जमीनें ट्रांसफर की थीं। इसी आधार पर लालू यादव , उनके परिवार के सदस्य और कई अन्य लोगों को आरोपी बनाया गया। इस केस में शुरुआत में कुल 98 लोगों को नामजद किया गया था , जिनमें अब अदालत ने 52 लोगों को दोषमुक्त कर दिया है।
अब सवाल उठता है कि अगर आरोप साबित होते हैं तो लालू परिवार को कितनी सजा हो सकती है। इस पर सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता संदीप मिश्रा ने INDIA TV से बातचीत में बताया कि इस मामले में प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट की धारा 8 , 9 , 11 , 12 और 13 लगाई गई हैं। इन धाराओं के तहत अधिकतम सात साल तक की सजा का प्रावधान है। इसके अलावा भारतीय दंड संहिता की धारा 467 , 468 और 471 भी लागू की गई हैं , जिनमें कड़ी सजा का प्रावधान है।
कानूनी जानकारों के मुताबिक , अगर सभी धाराओं में सजा एक साथ चलती है , तो अधिकतम सजा 10 साल तक हो सकती है। हालांकि , अगर अदालत सजाओं को क्रमवार यानी एक के बाद एक चलाने का आदेश देती है , तो कुल सजा की अवधि इससे अधिक भी हो सकती है। आमतौर पर अदालतें सजाओं को साथ-साथ चलाने का आदेश देती हैं , ऐसे में दोषी को सबसे अधिक अवधि वाली सजा ही काटनी होती है।
कोर्ट के इस फैसले के बाद अब पूरे मामले पर देशभर की राजनीतिक नजरें टिकी हुई हैं , क्योंकि यह केस बिहार की राजनीति और लालू परिवार के भविष्य पर बड़ा असर डाल सकता है। – Report by : वंशिका माहेश्वरी



