JNU में विवादित नारेबाजी पर सख्त रुख , कार्रवाई तेज
जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) में एक बार फिर विवादित नारेबाज़ी को लेकर सियासी और प्रशासनिक हलचल तेज हो गई है। 6 जनवरी 2026 को साबरमती परिसर में हुए एक प्रदर्शन से जुड़े वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद JNU प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है। विश्वविद्यालय का कहना है कि वायरल हो रहे वीडियो में कैंपस के नियमों और अनुशासन का खुला उल्लंघन दिखाई देता है , जिसे किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं किया जा सकता।
प्रशासन के अनुसार , प्रॉक्टोरियल टीम इन वीडियो फुटेज की बारीकी से जांच कर रही है ताकि प्रदर्शन में शामिल छात्रों या अन्य व्यक्तियों की पहचान की जा सके। JNU प्रशासन ने साफ शब्दों में कहा है कि परिसर की शांति भंग करने , आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल करने और शैक्षणिक माहौल को प्रभावित करने वाली किसी भी गतिविधि को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। दोषियों के खिलाफ विश्वविद्यालय के नियमों के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी।
इस पूरे मामले पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आने लगी हैं। भाजपा नेता गौरव वल्लभ ने JNU में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ लगाए गए नारों को गंभीर बताया। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसलों पर सवाल उठाना एक बात हो सकती है, लेकिन देश के चुने हुए प्रधानमंत्री और गृह मंत्री के खिलाफ अपशब्द कहना और उनके लिए “ कब्र खोदने ” जैसी भाषा का इस्तेमाल करना सीधे तौर पर राष्ट्रद्रोह और देशद्रोह के समान है। गौरव वल्लभ ने यह भी कहा कि दुख की बात यह है कि इस तरह की गतिविधियों का खर्च देश के 140 करोड़ करदाता उठाते हैं और ऐसे कृत्यों की जितनी निंदा की जाए , वह कम है।
वहीं उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने भी JNU कैंपस में हुई नारेबाज़ी पर कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि JNU एक शैक्षणिक संस्थान है , जहां लोग पढ़ाई करने जाते हैं। यदि राजनीति करनी है तो वह छात्र राजनीति के दायरे में होनी चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि प्रधानमंत्री और गृह मंत्री को निशाना बनाकर इस तरह की भाषा का क्या औचित्य है। राजभर के मुताबिक , यह स्पष्ट रूप से किसी राजनीतिक दल से प्रेरित भाषा है और ऐसी भाषा को किसी भी हाल में बोलने की अनुमति नहीं दी जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे लोगों के खिलाफ निश्चित रूप से कार्रवाई होगी।
इस मामले पर कांग्रेस नेता संदीप दीक्षित का भी बयान सामने आया है। उन्होंने कहा कि कई बार लोग या समूह अदालतों के फैसलों के खिलाफ विरोध दर्ज कराते हैं और लोकतंत्र में इसका अधिकार सभी को है। हालांकि , विरोध की आड़ में अपशब्दों का इस्तेमाल करना पूरी तरह गलत है। संदीप दीक्षित ने स्पष्ट किया कि यह केवल प्रधानमंत्री या गृह मंत्री का सवाल नहीं है , बल्कि किसी भी सामान्य व्यक्ति के लिए भी इस तरह की भाषा अस्वीकार्य है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस इस तरह की भाषा की निंदा करती है और पार्टी का हमेशा से मानना रहा है कि राजनीति में शब्दों की एक सभ्य और लोकतांत्रिक सीमा होनी चाहिए। समाज और राजनीति में इस तरह की भाषा का कोई स्थान नहीं है।
फिलहाल JNU प्रशासन की जांच जारी है और आने वाले दिनों में इस मामले में सख्त कार्रवाई के संकेत दिए जा रहे हैं। इस विवाद ने एक बार फिर कैंपस राजनीति , अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और अनुशासन की सीमाओं पर बहस को तेज कर दिया है। – Report by : वंशिका माहेश्वरी



