विजय दिवस : सेना के शौर्य को सलाम , देश ने दी श्रद्धांजलि
विजय दिवस भारत के इतिहास का सबसे गौरवशाली और प्रेरणादायक दिन माना जाता है। यह दिन भारतीय सेना के अदम्य साहस , शौर्य और सर्वोच्च बलिदान की याद दिलाता है। आज से 54 वर्ष पहले , 16 दिसंबर 1971 को भारत ने भारत – पाकिस्तान युद्ध में ऐतिहासिक विजय प्राप्त की थी। इस युद्ध में भारतीय सशस्त्र बलों ने अद्वितीय पराक्रम का परिचय देते हुए पाकिस्तान को निर्णायक शिकस्त दी और पूर्वी पाकिस्तान को मुक्त कराया , जिसके परिणामस्वरूप एक नए राष्ट्र बांग्लादेश का जन्म हुआ। यह जीत केवल एक सैन्य सफलता नहीं थी , बल्कि इसने दुनिया के सामने भारत की सैन्य क्षमता और राष्ट्रहित के प्रति उसके अटूट संकल्प को भी मजबूती से स्थापित किया।
विजय दिवस के अवसर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू , प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित कई राष्ट्रीय नेताओं ने भारतीय सशस्त्र बलों को श्रद्धांजलि अर्पित की और उनके योगदान को नमन किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा किए गए अपने संदेश में 1971 के युद्ध में भारतीय सेना की बहादुरी और बलिदान को याद किया। उन्होंने कहा कि भारतीय सेना ने उस समय अद्भुत साहस का प्रदर्शन करते हुए देश को ऐतिहासिक विजय दिलाई थी। पीएम मोदी ने अपने संदेश में उन वीर सैनिकों को स्मरण किया , जिनकी निष्ठा , निस्वार्थ सेवा और बलिदान से भारत को यह गौरवपूर्ण उपलब्धि मिली। उन्होंने कहा कि विजय दिवस सेना के शौर्य को सलाम करने और उनके अदम्य साहस को याद करने का दिन है , जो आने वाली पीढ़ियों को निरंतर प्रेरित करता रहेगा।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भी विजय दिवस पर 1971 के युद्ध में भारत को विजय दिलाने वाले वीर जवानों को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि भारतीय सेना की “ स्थानीयकरण के जरिए सशक्तिकरण ” की नीति भविष्य की चुनौतियों से निपटने की उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाती है। राष्ट्रपति ने अपने संदेश में यह भी उल्लेख किया कि ‘ ऑपरेशन सिंदूर ’ के दौरान सेना ने आत्मनिर्भरता , रणनीतिक संकल्प और आधुनिक युद्ध तकनीकों का प्रभावी उपयोग किया , जो पूरे देश के लिए प्रेरणास्रोत है। उन्होंने कहा कि वीर सैनिकों के साहस , शौर्य और निस्वार्थ सेवा ने देश को गर्व से भर दिया है और उनकी वीरता सदैव देशवासियों को प्रेरित करती रहेगी।
गौरतलब है कि 16 दिसंबर 1971 को भारत – पाकिस्तान युद्ध के दौरान पाकिस्तानी सेना ने भारतीय सेना के समक्ष आत्मसमर्पण किया था। इस युद्ध में पाकिस्तान के लगभग 93 हजार सैनिकों ने अपने हथियार डाल दिए थे , जिसका नेतृत्व पाकिस्तानी जनरल ए.ए. खान नियाजी कर रहे थे। यह आत्मसमर्पण द्वितीय विश्व युद्ध के बाद दुनिया के सबसे बड़े सैन्य आत्मसमर्पणों में से एक माना जाता है।
विजय दिवस न केवल भारत की सैन्य शक्ति का प्रतीक है , बल्कि यह देश के उन वीर सपूतों की अमर गाथा भी है , जिन्होंने मातृभूमि की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया। यह दिन देशवासियों को एकजुट होकर राष्ट्र के प्रति कर्तव्य और सम्मान की भावना को और मजबूत करने की प्रेरणा देता है। – Report by : वंशिका माहेश्वरी



