नई सुरक्षा नीति के तहत, CISF कर्मियों का कार्यकाल अब चार साल, अतिरिक्त विस्तार संभव
केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) ने संसद की सुरक्षा को मजबूत करने के लिए नई पोस्टिंग पॉलिसी शुरू की है। यह कदम सांसदों से मिलने वाली शिकायतों और सुरक्षा खतरों को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है। नई नीति के तहत, संसद भवन परिसर की सुरक्षा में तैनात कर्मियों का कार्यकाल अब मौजूदा तीन वर्षों से बढ़ाकर चार वर्ष कर दिया गया है, साथ ही इसमें एक साल का अतिरिक्त विस्तार भी संभव है। यह परिवर्तन आतंकवाद-रोधी और तोड़फोड़-रोधी सुरक्षा को और मजबूत बनाने के उद्देश्य से किया गया है, ताकि संसद की सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक प्रभावी और जवाबदेह बनाया जा सके।
नई पोस्टिंग नीति का उद्देश्य
संसद की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए लागू की गई नई पोस्टिंग नीति का मुख्य उद्देश्य तैनात कर्मियों की कार्यकुशलता और परिचितता को बढ़ाना है। अधिकारी ने बताया कि, “नए ढांचे के तहत, कार्मिकों का कार्यकाल मौजूदा तीन साल से बढ़ाकर चार साल कर दिया गया है, जिसमें योग्य कर्मियों के आधार पर एक अतिरिक्त वर्ष का विस्तार भी किया जा सकता है।” इस नीति का उद्देश्य न केवल मौजूदा सुरक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाना है, बल्कि तैनात कर्मियों की सांसदों के साथ परिचितता बढ़ाना और संसद भवन परिसर के भीतर उनकी आवाजाही और परिचालन में दक्षता लाना भी है।
सुरक्षा मानकों का सख्ती से पालन
नई नीति के तहत, संसद सुरक्षा कर्मियों को कई कठोर मानकों और मूल्यांकन प्रक्रिया से गुजरना होगा। इनमें मनोवैज्ञानिक मूल्यांकन, युद्ध शारीरिक दक्षता परीक्षण (BPET), विशिष्ट प्रेरण प्रशिक्षण और व्यापक सुरक्षा मंजूरी पास करना अनिवार्य है। इन परीक्षणों का उद्देश्य कर्मियों की शारीरिक और मानसिक दक्षता का आकलन करना है, ताकि वे किसी भी आपातकालीन स्थिति का सामना कर सकें।
तैनाती और संसाधन
पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों की संयुक्त टीम ने संसद की सुरक्षा को मजबूत करने के लिए कई कदम उठाए हैं। अधिकारियों के अनुसार, “हवाई अड्डे जैसी सुरक्षा प्रोटोकॉल लागू करने के लिए 200 से अधिक अग्निशमन और आपदा प्रबंधन विशेषज्ञों सहित 3300 से अधिक कर्मियों की एक टुकड़ी तैनात की गई है।” इस सुरक्षा बल का मुख्य ध्यान उभरते खतरों का मुकाबला करने पर है, जिसमें ड्रोन खतरों, साइबर सुरक्षा और सीबीआरएन (रासायनिक, जैविक, विकिरण और परमाणु) से होने वाले खतरों से निपटने पर विशेष प्रशिक्षण शामिल है।
पिछले बदलाव और सुरक्षा चूक का असर
पिछले साल, संसद भवन की सुरक्षा व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण बदलाव किया गया था, जब दिल्ली पुलिस की जगह CISF को तैनात किया गया। यह बदलाव 13 दिसंबर, 2023 को हुई एक सुरक्षा चूक के बाद हुआ, जिसमें कुछ लोगों ने संसद भवन में घुसकर धुएँ के कैनिस्टर्स खोल दिए थे। इस घटना ने सुरक्षा व्यवस्था की कमजोरियों को उजागर किया और यह संकेत दिया कि संसद की सुरक्षा में और सुधार की आवश्यकता है।
कार्यभार संभालने के बाद, CISF ने संसद की सभी मुख्य सुरक्षा परतों का कार्यभार संभाल लिया। इसमें प्रवेश नियंत्रण, परिधि और आंतरिक सुरक्षा, आतंकवाद और तोड़फोड़-रोधी प्रतिक्रिया, बम खतरा प्रबंधन, आग एवं आपदा तैयारियों जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां शामिल हैं।
सुरक्षा बल की क्षमताओं में वृद्धि
CISF अपने संसाधनों और क्षमताओं को लगातार बढ़ा रहा है। इसमें ड्रोन तकनीक, साइबर सुरक्षा, और रासायनिक, जैविक, विकिरण और परमाणु (CBRN) खतरों से निपटने के लिए विशेष प्रशिक्षण शामिल है। इसके अलावा, सुरक्षा बल के जवानों को नियमित रूप से अभ्यास और प्रशिक्षण दिया जा रहा है ताकि वे किसी भी खतरे का तुरंत और प्रभावी ढंग से सामना कर सकें।
सुरक्षा में नई तकनीकों का समावेश
संसद की सुरक्षा में नई तकनीकों का भी समावेश किया गया है। ड्रोन तकनीक का इस्तेमाल खतरों का पता लगाने और निगरानी करने के लिए किया जा रहा है। साइबर सुरक्षा पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है, ताकि डिजिटल खतरों से संसद की जानकारी और संचार प्रणालियों को सुरक्षित रखा जा सके।
सुरक्षा के नए मानदंड और प्रशिक्षण
सभी तैनात कर्मियों को मनोवैज्ञानिक मूल्यांकन और शारीरिक दक्षता परीक्षण से गुजरने के बाद ही तैनाती दी जा रही है। इसके साथ ही, उन्हें विशेष प्रेरण प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है, ताकि वे नई सुरक्षा चुनौतियों का सामना कर सकें। इन मानकों का उद्देश्य सुरक्षा कर्मियों की गुणवत्ता और तत्परता को सुनिश्चित करना है।संसद की सुरक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए यह नई पोस्टिंग नीति एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे न केवल सुरक्षा बल की कार्यक्षमता में सुधार होगा, बल्कि सांसदों और संसद भवन की सुरक्षा भी मजबूत होगी। यह कदम देश की संवैधानिक संस्थाओं की सुरक्षा के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। आगे भी, सुरक्षा एजेंसियां अपनी क्षमताओं और संसाधनों को बढ़ाते हुए, किसी भी खतरे का सामना करने के लिए तैयार रहेंगी। संसद की सुरक्षा की यह नई नीति भारत के लोकतंत्र की रक्षा के लिए एक मजबूत आधार बन सकती है।



