बांग्लादेश की इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल ने पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को फांसी की सजा सुनाई
बांग्लादेश की इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल ने पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को फांसी की सजा सुनाई है, जिसके बाद देश में भारी हलचल मच गई है। यह फैसला बांग्लादेश की राजनीति और सामाजिक माहौल दोनों के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ माना जा रहा है। इस फैसले के खिलाफ अनेक विपक्षी दलों और नागरिक संगठनों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया है। वहीं, इस फैसले के बाद देश में राजनीतिक अस्थिरता का माहौल व्याप्त हो गया है।
इस बीच, निर्वासित लेखिका तसलीमा नसरीन ने इस फैसले का कड़ा विरोध किया है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि हर तरह के अन्याय का विरोध करना चाहिए। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि शेख हसीना ने अपने शासनकाल के दौरान देश को बर्बाद कर दिया है। नसरीन ने कहा, “भले ही शेख हसीना ने अनगिनत मस्जिदें और मदरसे बनवाए हों, और इन जिहादी कारखानों को समर्थन दिया हो, इसने देश की सामाजिक और शैक्षणिक व्यवस्था को बर्बाद कर दिया है।”
तसलीमा नसरीन ने अपने पोस्ट में कहा कि हसीना ने मदरसे की डिग्रियों को विश्वविद्यालय की डिग्रियों के बराबर मानकर शिक्षा व्यवस्था को नष्ट कर दिया है। साथ ही, उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि हसीना ने महिलाओं से द्वेष रखने वाले जिहादी तत्वों को युवाओं का ब्रेनवॉश करने का अवसर दिया। नसरीन ने इस फैसले को राजनीतिक प्रतिशोध और असमानता का प्रतीक बताया है, और कहा कि इस तरह का फैसला पूरे देश की सामाजिक और राजनीतिक स्थिरता के लिए खतरनाक है।
यह मामला बांग्लादेश में मानवाधिकारों, न्याय व्यवस्था और राजनीतिक स्वतंत्रता के मुद्दों को फिर से उजागर कर रहा है। आलोचकों का मानना है कि यह फैसला राजनीतिक प्रतिशोध का परिणाम है, जबकि समर्थक इसे न्याय का उचित कदम मान रहे हैं। इस फैसले के बाद बांग्लादेश की राजनीति में तीव्र विवाद और अस्थिरता की आशंका बनी हुई है।
शेख हसीना का यह फैसला देश के राजनीतिक इतिहास में एक ऐतिहासिक घटना माना जा रहा है। यह कदम देश के राजनीतिक परिवर्तन, न्याय और स्वतंत्रता की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर हो सकता है। वहीं, देश में इस फैसले को लेकर विभाजन की स्थिति बनी हुई है, और विभिन्न राजनीतिक दल अपने-अपने दृष्टिकोण से इस मुद्दे को देख रहे हैं। देश की जनता और अंतरराष्ट्रीय समुदाय भी इस फैसले पर अपनी प्रतिक्रियाएं व्यक्त कर रहे हैं।



