गौरा बौराम में लालटेन पर निशाना, तेजस्वी यादव की रणनीति पर सवाल
पटना :महागठबंधन में चल रही सीट बंटवारे की जटिल प्रक्रिया के बीच गौरा बौराम सीट पर बड़ी अजीबोगरीब स्थिति सामने आई है। यहां पर तेजस्वी यादव को अपने ही पार्टी के चुनाव चिन्ह “लालटेन” के खिलाफ वोट मांगना पड़ेगा। गौड़ा बौराम में EVM पर लालटेन का निशान मौजूद रहेगा, लेकिन साथ ही VIP का चुनाव चिन्ह भी है, जो नाव है। VIP के राष्ट्रीय अध्यक्ष संतोष सहनी इस सीट से उम्मीदवार हैं, वहीं दूसरी ओर राजद के उम्मीदवार अफजल अली खान हैं।राजद ने आज अपनी 143 सीटों की सूची जारी की है, जिसमें गौड़ा बौराम सीट का नाम शामिल नहीं है। इसका मतलब है कि राजद इस सीट पर अपने उम्मीदवार को नहीं मानता। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या यहां राजद के नेता “लालटेन” के खिलाफ प्रचार करेंगे।
पूरा मामला क्या है?
दरअसल, जब महागठबंधन में सीट बंटवारा अंतिम रूप नहीं ले पाया था, तब सभी पार्टियां अपने-अपने उम्मीदवारों को चुनाव चिन्ह दे रही थीं। इसी दौरान गौड़ा बौराम सीट से राजद ने अफजल अली को अपना उम्मीदवार घोषित कर दिया। अफजल अली ने सिंबल लेकर गौड़ा बौराम पहुंचे, तभी तक समझौते में यह तय था कि सीट VIP के खाते में जाएगी। लेकिन अचानक स्थिति बदल गई और यह सीट VIP के खाते में चली गई।
हालांकि, अफजल अली खान ने अपने सिंबल को वापस करने से इनकार कर दिया। वे नामांकन के बाद भी अपने नामांकन पर डटे रहे और अंततः उन्हें राजद का अधिकृत उम्मीदवार मान लिया गया। उन्हें “लालटेन” चुनाव चिन्ह भी दे दिया गया।
ऐसी स्थिति पहले भी हुई है
इस तरह का मामला लोकसभा चुनाव के दौरान राजस्थान में भी देखने को मिला था। बांसवाड़ा सीट पर पहले कांग्रेस ने अरविंद डामोर को उम्मीदवार बनाया था। लेकिन बाद में पार्टी ने भारतीय आदिवासी पार्टी के उम्मीदवार राजकुमार रोत का समर्थन करने का फैसला किया। अरविंद ने सिंबल वापस करने से इनकार कर दिया और नामांकन वापस लेने की अंतिम तिथि बीतने के बाद भी उन्होंने चुनाव लड़ा। परिणामस्वरूप, वह लगभग 61 हजार वोट हासिल कर गए, लेकिन अंततः कांग्रेस समर्थित उम्मीदवार ही जीता।
VIP उम्मीदवार का आरोप और हाईकोर्ट जाने की धमकी
VIP के उम्मीदवार ने निर्वाचनी अधिकारियों पर पक्षपात का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि राजद की चिट्ठी के बावजूद “लालटेन” का सिंबल नहीं हटाया जाना गलत है। वह हाईकोर्ट का रुख करने का भी संकेत दे रहे हैं।यह स्थिति महागठबंधन के लिए चिंता का विषय बन गई है, क्योंकि ईवीएम पर “लालटेन” का चुनाव चिन्ह मौजूद रहना, उनके चुनाव प्रचार पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है। यदि चुनाव दौरान यह छवियां बनी रहीं, तो यह महागठबंधन के वोट बैंक को प्रभावित कर सकता है।
गौड़ा बौराम सीट का यह मामला महागठबंधन की जटिलता और उम्मीदवारों के बीच मतभेदों को उजागर करता है। यह स्थिति दर्शाती है कि चुनावी रणनीति और सीट बंटवारे की प्रक्रिया कितनी पेचीदा हो सकती है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि यह मामला कोर्ट तक पहुंचता है, तो यह आगामी चुनावी परिणामों को प्रभावित कर सकता है।यह स्थिति चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर भी सवाल खड़े करता है। महागठबंधन के नेताओं को चाहिए कि वे इस विवाद का जल्द समाधान करें ताकि चुनावी माहौल शांतिपूर्ण और निष्पक्ष बना रहे।



