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एसएससी परीक्षाओं में अव्यवस्था से भड़के छात्र , सिस्टम की पारदर्शिता पर उठे सवाल

 एसएससी परीक्षाओं में अव्यवस्था से भड़के छात्र , सिस्टम की पारदर्शिता पर उठे सवाल
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नई दिल्ली : कर्मचारी चयन आयोग (SSC) की CGL 2025 और अन्य परीक्षाओं में भारी कुप्रबंधन और अनियमितताओं के आरोपों के बाद अभ्यर्थियों का गुस्सा भड़क उठा है। शुक्रवार को अभ्यर्थियों और छात्र संगठनों ने एक संयुक्त प्रेस वार्ता कर एसएससी पर परीक्षा की पारदर्शिता और अखंडता से खिलवाड़ का आरोप लगाया।

छात्रों ने आयोग से सभी हालिया परीक्षाएं रद्द करने ,अभ्यर्थियों पर दर्ज एफआईआर वापस लेने ,और एक स्वतंत्र छात्र आयोग गठित करने की मांग की है।

अभ्यर्थियों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में 16 प्रमुख मुद्दों को चिन्हित कर विस्तार से चर्चा की। इनमें तकनीकी गड़बड़ियों से लेकर प्रशासनिक लापरवाही तक कई गंभीर बातें सामने आईं।

मुख्य आरोप इस प्रकार हैं —

1. परीक्षा केंद्रों पर तकनीकी खामियां और सर्वर फेलियर
2. वेबकैम और सीसीटीवी निगरानी में लापरवाही
3. सिस्टम क्षमता से अधिक रोल नंबर जारी करना
4. स्पष्ट री-एग्जाम (पुनः परीक्षा) नीति का अभाव
5. फीडबैक बटन का न चलना और हेल्पडेस्क की असफलता
6. कई शहरों में परीक्षा केंद्रों का अनुचित आवंटन
7. गलत प्रश्न और अमान्य विकल्पों का समावेश

छात्रों ने बताया — “ सिर्फ तकनीकी गलती नहीं, सिस्टम की विफलता है ”
अभ्यर्थी राम कुमार ने कहा ,“ यह महज तकनीकी गलती नहीं बल्कि पूरे सिस्टम की विफलता है, जिसने लाखों छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया है। ”
उन्होंने पूछा कि यदि प्री-एग्जाम ऑडिट होते हैं, तो इतने खराब केंद्रों को मंजूरी कैसे दी गई ?

छात्रों ने यह भी सवाल उठाया कि परीक्षा संचालन में शामिल एडुक्विटी कैरियर टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड जैसे वेंडर पर क्या कार्रवाई की जाएगी।

अभ्यर्थियों ने बताया कि कई केंद्रों को आवासीय भवनों, बैंक्वेट हॉल और गैर-तकनीकी स्थानों में बनाया गया था, जहाँ न तो बिजली की सुविधा थी, न ही पर्याप्त कंप्यूटर संसाधन।

पवन गंगा और लोटस लैब्स केंद्रों पर छात्रों के साथ मारपीट और अवैध हिरासत की घटनाएँ भी सामने आईं। एक महिला अभ्यर्थी ने आरोप लगाया कि उसके साथ सुरक्षा गार्ड ने हमला किया।

छात्रों ने कहा कि यह घटनाएँ परीक्षा की अखंडता पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं।

अभ्यर्थी अभिषेक चौधरी ने बताया कि कुछ शिफ्टों में 15 से अधिक गलत या तकनीकी रूप से अमान्य प्रश्न पूछे गए। उन्होंने कहा कि प्रश्न बैंक की पूर्व-जाँच नहीं की गई और अनुभवहीन वेंडरों को परीक्षा संचालन का जिम्मा सौंपा गया।

इसके अलावा, अभ्यर्थियों ने एसएससी के आधिकारिक X (ट्विटर) हैंडल पर छात्रों के प्रश्नों के जवाब न देने और शिकायत करने वालों को ब्लॉक करने का भी आरोप लगाया।

अभ्यर्थियों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान अपनी मुख्य मांगें भी रखीं —

1. सभी हालिया एसएससी परीक्षाओं को तत्काल रद्द किया जाए।
2. अभ्यर्थियों पर दर्ज एफआईआर वापस ली जाएं।
3. एक स्वतंत्र छात्र आयोग बनाया जाए जो परीक्षा प्रक्रिया की निगरानी करे।
4. खराब केंद्र प्रबंधन के लिए जिम्मेदार वेंडर और अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई हो।
5. परीक्षा प्रणाली में सुधार और पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए।

अभ्यर्थियों का कहना है कि एसएससी जैसे प्रतिष्ठित संस्थान से उम्मीद की जाती है कि वह देश के युवाओं के भविष्य के साथ ईमानदारी बरते। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि आयोग ने समय रहते कदम नहीं उठाए, तो यह आंदोलन राष्ट्रीय स्तर पर व्यापक विरोध में बदल सकता है।

 

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