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भोपाल में पुलिसकर्मियों ने DSP के साले को पीट-पीटकर मौत के घाट उतारा, दो कांस्टेबल सस्पेंड

 भोपाल में पुलिसकर्मियों ने DSP के साले को पीट-पीटकर मौत के घाट उतारा, दो कांस्टेबल सस्पेंड
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मध्य प्रदेश के भोपाल में पुलिस की बेरहमीपूर्ण पिटाई के बाद एक युवक की मौत का मामला सुर्खियों में है। घटना बीते शुक्रवार की रात पिपलानी थाना क्षेत्र की है, जहां 25 वर्षीय उदित, जो बालाघाट के डीएसपी का साला बताया जा रहा है, की पुलिस की पिटाई के कारण मौत हो गई। इस घटना ने पूरे प्रदेश में पुलिसिया कार्रवाई और मानवाधिकारों को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

घटना का विवरण

प्राप्त जानकारी के अनुसार, उदित तीन दिन पहले ही बेंगलुरु से भोपाल आया था, जहां उसने कॉलेज में कुछ दस्तावेजों का काम किया था। शुक्रवार रात वह अपने दोस्तों के साथ एक पार्टी में शामिल हुआ था। उसी दौरान, दो पुलिसकर्मियों — संतोष बामनिया और सौरभ आर्य — ने allegedly उसे बेरहमी से पीटा। इस घटना का सीसीटीवी वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें स्पष्ट देखा जा सकता है कि पुलिसकर्मी उदित के साथ मारपीट कर रहे हैं।

पुलिस की इस कार्रवाई के बाद उदित बेहोश हो गया, जिसके बाद उसके दोस्तों ने उसे तुरंत अस्पताल पहुंचाया। भोपाल के एम्स अस्पताल में डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। शुरुआती जांच में पुलिस ने कहा था कि उदित की मौत हार्ट अटैक से हुई है, लेकिन पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि उसकी मौत गंभीर चोटों के कारण हुई है। रिपोर्ट में बताया गया है कि शरीर पर गहरी चोटें पाई गई हैं, खासकर पैंक्रियाज (अग्नाशय) में।

परिवार का आरोप और पुलिस कार्रवाई

परिजनों का आरोप है कि पुलिसकर्मियों ने बेरहमी से मारपीट की, जिससे उसकी हालत बिगड़ गई। पुलिस की शुरुआती जांच के बाद यह भी कहा गया कि मौत का कारण हार्ट अटैक था, लेकिन पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट ने इस बात को खारिज कर दिया है। इस घटना के बाद राज्य सरकार और पुलिस महकमे ने तुरंत कार्रवाई करते हुए दोनों आरोपित कांस्टेबलों — संतोष बामनिया और सौरभ आर्य — को निलंबित कर दिया। साथ ही, दोनों के खिलाफ हत्या का मामला भी दर्ज किया गया है।

सामाजिक और राजनीतिक प्रतिक्रिया

यह घटना मध्य प्रदेश के सामाजिक और राजनीतिक जगत में गहरा आक्रोश उत्पन्न कर गई है। मानवाधिकार संगठनों ने पुलिस की इस कार्रवाई की निंदा करते हुए तत्काल निष्पक्ष जांच की मांग की है। विपक्षी दलों ने भी इस मामले को लेकर सरकार पर सवाल खड़े किए हैं और कहा है कि पुलिस की इस तरह की हिंसक कार्रवाई निंदनीय है।

निष्पक्ष जांच की आवश्यकता

मामले की गंभीरता को देखते हुए, पुलिस विभाग ने कहा है कि इस घटना की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराई जाएगी। साथ ही, यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि दोषी पुलिसकर्मियों को उनके कृत्यों के लिए कठोर से कठोर सजा दी जाए। मामले की जांच के लिए एसआईटी गठित कर दी गई है, जो पूरे घटनाक्रम की छानबीन करेगी। भोपाल की इस घटना ने पुलिसिया कार्रवाई और मानवाधिकार संरक्षण के मुद्दों को फिर से सामने ला दिया है। यह जरूरी है कि ऐसी घटनाओं की कड़ी निंदा हो और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए ताकि पुलिस के प्रति जनता का विश्वास बना रहे। साथ ही, यह भी आवश्यक है कि पुलिसकर्मी भी अपने कर्तव्य का पालन मानवाधिकारों का सम्मान करते हुए करें। इस घटना के हर पहलू की जांच जरूरी है ताकि न्याय सुनिश्चित हो सके और भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों।

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