GST दरों में कमी से सरकार को नुकसान, वित्त मंत्री बोले– आने वाले महीनों में बढ़ेगा राजस्व
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 15 अगस्त को जीएसटी (वस्तु एवं सेवा कर) से आम जनता को दीपावली से पहले राहत देने की घोषणा का असर अब राज्य सरकार के राजस्व पर दिखने लगा है। सितंबर माह में प्रदेश को जीएसटी से मिलने वाला राजस्व पिछले वर्ष की तुलना में घटा है। वित्त विभाग के आंकड़ों के अनुसार, इस बार सरकार को जीएसटी से 497.72 करोड़ रुपये कम प्राप्त हुए हैं।
जीएसटी दरों में कमी की घोषणा के बाद उपभोक्ताओं ने बड़ी खरीददारी करने से पहले दरें घटने का इंतजार किया, जिससे सितंबर महीने में व्यापारिक लेनदेन में थोड़ी सुस्ती रही। हालांकि, 22 सितंबर से नई जीएसटी दरें लागू होने के बाद कारोबार में तेजी आने लगी है। वित्त विशेषज्ञों का मानना है कि इसका सकारात्मक प्रभाव अक्टूबर और नवंबर में देखने को मिलेगा, जब लोग त्योहारी सीजन में अधिक खरीददारी करेंगे।
राज्य के वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने कहा कि दरों में कमी से प्रारंभिक तौर पर राजस्व घट सकता है, लेकिन बाजार की गतिविधियों में बढ़ोतरी से आगे आने वाले महीनों में जीएसटी से राजस्व में वृद्धि निश्चित रूप से होगी। उन्होंने बताया कि यह कदम उपभोक्ताओं और व्यापारियों दोनों के लिए राहतकारी साबित होगा और इससे राज्य की अर्थव्यवस्था को दीर्घकालिक लाभ मिलेगा।
राजस्व आंकड़ों के अनुसार, पिछले वर्ष सितंबर में सरकार को कुल 14,747.93 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ था। इस वर्ष सितंबर में जीएसटी और खनन विभाग को छोड़कर वैट, आबकारी, स्टांप एवं निबंधन, तथा परिवहन विभाग से पिछले वर्ष की तुलना में अधिक राजस्व प्राप्त हुआ है। यह संकेत देता है कि अन्य स्रोतों से राज्य की आय में स्थिरता बनी हुई है।
वित्त मंत्री ने बताया कि चालू वित्तीय वर्ष 2025-26 में सितंबर तक कुल राजस्व प्राप्ति का लक्ष्य 1,40,939.55 करोड़ रुपये तय किया गया था, जिसके मुकाबले अब तक 1,04,568.93 करोड़ रुपये यानी 74.2 प्रतिशत राजस्व प्राप्त हुआ है। वहीं, करेत्तर राजस्व का लक्ष्य 11,388.05 करोड़ रुपये था, जिसके मुकाबले 6,743.21 करोड़ रुपये यानी 59.2 प्रतिशत की प्राप्ति हुई है।
सरकार को उम्मीद है कि आगामी महीनों में बाजार की रौनक बढ़ने और त्योहारी खरीददारी के चलते जीएसटी कलेक्शन में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिलेगा। वित्त मंत्री ने भरोसा जताया कि दरों में कमी से न केवल उपभोक्ताओं को राहत मिलेगी, बल्कि इससे राज्य के राजस्व तंत्र में दीर्घकालिक मजबूती भी आएगी।



