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मां-बेटी गैंगरेप केस में कोर्ट का सख्त फैसला

 मां-बेटी गैंगरेप केस में कोर्ट का सख्त फैसला
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बुलंदशहर : उत्तर प्रदेश के बहुचर्चित बुलंदशहर हाईवे गैंगरेप कांड में करीब आठ साल बाद न्याय का फैसला सामने आ गया है। नेशनल हाईवे-91 पर मां-बेटी के साथ सामूहिक दुष्कर्म और पूरे परिवार से लूटपाट के मामले में विशेष पॉक्सो न्यायाधीश ओपी वर्मा ने पांच दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है। इसके साथ ही प्रत्येक दोषी पर 1.81 लाख रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है , जिसकी आधी राशि पीड़िता बेटी और उसकी मां को दी जाएगी।

यह दिल दहला देने वाली घटना 28 जुलाई 2016 की रात की है , जब गाजियाबाद निवासी एक परिवार कार से शाहजहांपुर अपने पैतृक गांव में तेरहवीं कार्यक्रम में शामिल होने जा रहा था। परिवार के छह सदस्य – किशोरी , उसके पिता , मां , ताई , ताऊ और तहेरे भाई – देहात कोतवाली क्षेत्र में दोस्तपुर फ्लाईओवर के पास पहुंचे ही थे कि अज्ञात बदमाशों ने उनकी कार पर लोहे की वस्तु फेंककर उसे रुकवा लिया।

इसके बाद आरोपियों ने पूरे परिवार को बंधक बना लिया और कार समेत सड़क के दूसरी ओर एक खेत में ले गए। वहां तीन पुरुषों के हाथ – पैर बांध दिए गए और 14 वर्षीय किशोरी तथा उसकी मां के साथ खेत में ले जाकर सामूहिक दुष्कर्म की जघन्य वारदात को अंजाम दिया गया। वारदात के बाद आरोपी पीड़ित परिवार से लूटपाट कर फरार हो गए।

इस मामले की सुनवाई के दौरान पीड़ित परिवार ने दोषियों के लिए फांसी की सजा की मांग की थी। सजा सुनाते हुए एडीजीसी वरुण कौशिक ने अदालत में कहा , “ ऐसे राक्षसों को सभ्य समाज से दूर रखना जरूरी है। ” अदालत ने अपराध की गंभीरता , पीड़ितों पर पड़े मानसिक और सामाजिक प्रभाव तथा समाज को दिए जाने वाले संदेश को ध्यान में रखते हुए यह कड़ा फैसला सुनाया।

हालांकि , सजा सुनाए जाने के बाद दोषियों ने खुद को निर्दोष बताते हुए कहा कि उन्हें गलत तरीके से फंसाया गया है और बेकसूरों को सजा दी गई है।

इस प्रकरण में जांच की शुरुआत स्थानीय पुलिस ने की थी , लेकिन गंभीर लापरवाही सामने आने पर तत्कालीन एसएसपी समेत 17 पुलिसकर्मियों पर शासन स्तर से कार्रवाई की गई थी। शुरुआती जांच में पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया था , लेकिन वे निर्दोष पाए गए। इसके बाद इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश पर मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी गई।

सीबीआई जांच में बावरिया गिरोह के सदस्यों के नाम सामने आए , जिनमें जुबैर उर्फ सुनील उर्फ परवेज , सलीम उर्फ बीना उर्फ दीवानजी और साजिद निवासी गांव इटखारी बिनौरा , थाना तिर्वा , जनपद कन्नौज शामिल थे। इनके साथ तीन अन्य आरोपियों – रहीसुद्दीन , जावेद उर्फ शावेज और जबर सिंह – के नाम भी सामने आए। हालांकि , साक्ष्यों के अभाव में इन तीनों को जांच से बाहर कर दिया गया।

सीबीआई ने जुबैर , सलीम और साजिद के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी , जिन पर 11 अप्रैल 2017 को आरोप तय किए गए। इस केस में कुल छह आरोपी नामजद थे , जिनमें से एक की जिला कारागार में बीमारी के चलते मौत हो चुकी है , जबकि दो अन्य आरोपी अलग-अलग मामलों में नोएडा और हरियाणा पुलिस एनकाउंटर में मारे जा चुके हैं।

करीब आठ साल बाद आए इस फैसले को पीड़ित परिवार और समाज के लिए एक बड़ा न्यायिक संदेश माना जा रहा है। अदालत का यह निर्णय न सिर्फ पीड़ितों के दर्द को मान्यता देता है , बल्कि ऐसे जघन्य अपराधों के खिलाफ सख्त रुख को भी दर्शाता है। – Report by : वंशिका माहेश्वरी 

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